Jane Street का 4800 करोड़ का ‘खेल’: कैसे एक एल्गोरिदम ने भारतीय बाजार को अपनी उंगलियों पर नचाया!
क्या आपको कभी लगा है कि शेयर बाजार में आप सही दांव लगाते हैं, फिर भी हार जाते हैं? क्या कभी ऐसा महसूस हुआ है कि इंडेक्स (Nifty या Bank Nifty) किसी अदृश्य शक्ति के इशारे पर चल रहा है? अगर हाँ, तो आपकी शंका गलत नहीं थी। भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक ऐसा भूचाल आया है जिसने रिटेल निवेशकों की नींद उड़ा दी है। SEBI ने हाल ही में एक सनसनीखेज आदेश जारी करते हुए Jane Street Group—एक वैश्विक प्रोपराइटरी ट्रेडिंग फर्म—पर प्रतिबंध लगा दिया है और 4800 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध लाभ (illegal gains) जब्त करने का निर्देश दिया है। यह महज एक वित्तीय अनियमितता नहीं है; यह एक सुनियोजित ‘डकैती’ है जिसे हाई-स्पीड एल्गोरिदम और भारी पूंजी के दम पर अंजाम दिया गया।
दुपहरी का धोखा: ‘Intraday Index Manipulation’ का काला सच
SEBI की जांच में जो सामने आया है, वह किसी बॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं है। Jane Street Group ने बाजार को नचाने के लिए एक बेहद शातिर रणनीति अपनाई, जिसे SEBI ने “Intraday Index Manipulation” का नाम दिया है। चलिए, 17 जनवरी 2024 की घटना को डीकोड करते हैं, जो इस घोटाले का सबसे बड़ा सबूत है।
सुबह के सत्र में (Patch I), जब आम निवेशक बाजार के रुख को समझने की कोशिश कर रहे थे, Jane Street ने Bank Nifty के शेयरों (जैसे HDFC Bank, ICICI Bank) में अंधाधुंध खरीदारी शुरू कर दी। उन्होंने कैश और फ्यूचर्स मार्केट में लगभग 4,370 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इसका मकसद निवेश करना नहीं था, बल्कि इंडेक्स को कृत्रिम रूप से ऊपर चढ़ाना था। जब इंडेक्स ऊपर गया, तो आम निवेशकों को लगा कि बाजार में तेजी है। लेकिन इसी दौरान, Jane Street ने चुपके से ऑप्शंस मार्केट (Options Market) में भारी मात्रा में ‘Puts’ खरीदे और ‘Calls’ बेचे—यानी उन्होंने बाजार के गिरने पर सबसे बड़ा दांव लगा दिया।
फिर आया दोपहर का खेल (Patch II)। 11:49 बजे के बाद, Jane Street ने सुबह खरीदे गए सभी शेयरों को बेचना शुरू कर दिया। यह बिकवाली इतनी आक्रामक थी कि बाजार धड़ाम से नीचे आ गया। इस प्रक्रिया में उन्हें कैश मार्केट में तो 61.6 करोड़ का नुकसान हुआ, लेकिन ऑप्शंस मार्केट में उनकी कमाई 734 करोड़ रुपये से ज्यादा रही। यह ऐसा था जैसे कोई खुद आग लगाए और फिर फायर इंश्योरेंस क्लेम कर ले।
चेतावनी को ठेंगा: ‘Marking the Close’ और अहंकार की हद
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि Jane Street Group का रवैया कितना ढीठ और अहंकारी था। फरवरी 2025 में NSE ने उन्हें स्पष्ट चेतावनी (Caution Letter) जारी की थी कि उनकी ट्रेडिंग गतिविधियां संदिग्ध हैं और बाजार की अखंडता (Market Integrity) के लिए खतरा हैं। लेकिन, इस चेतावनी का उन पर कोई असर नहीं हुआ।
मई 2025 में, उन्होंने अपनी रणनीति को थोड़ा बदला और “Extended Marking the Close” का खेल शुरू किया। 15 मई 2025 को, जो Nifty की वीकली एक्सपायरी थी, उन्होंने बाजार बंद होने से ठीक पहले (आखिरी एक घंटे में) भारी खरीदारी की ताकि इंडेक्स का क्लोजिंग प्राइस ऊपर जाए। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उन्होंने पहले ही बुलिश (तेजी वाले) ऑप्शंस पोजिशन ले रखी थीं। एक्सपायरी के दिन क्लोजिंग प्राइस को अपनी मर्जी से सेट करना—यह सीधे तौर पर मैच फिक्सिंग जैसा है। इस एक दिन में उन्होंने अपनी डेल्टा पोजिशन (Delta Exposure) को 55,000 करोड़ रुपये से अधिक शिफ्ट कर दिया। यह नियामक संस्थाओं (Regulators) के मुंह पर तमाचा था।
रिटेल निवेशक बनाम एल्गोरिदम: एक असमान लड़ाई
यह पूरा मामला हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या बाजार सच में निष्पक्ष है? जब Jane Street जैसी संस्थाएं, जिनके पास अरबों डॉलर की पूंजी और सुपरकंप्यूटर जैसी तकनीक है, बाजार में उतरती हैं, तो एक आम रिटेल ट्रेडर की क्या बिसात?
आंकड़े डराने वाले हैं। SEBI की रिपोर्ट बताती है कि 93% रिटेल ट्रेडर F&O सेगमेंट में पैसा गंवाते हैं। अब समझ में आता है कि यह पैसा जा कहां रहा था। 17 जनवरी 2024 जैसे दिनों में, जब लाखों छोटे ट्रेडर चार्ट देख रहे थे, Jane Street अपनी भारी वॉल्यूम से चार्ट को ही बदल रहा था। वे कैश मार्केट में जानबूझकर नुकसान उठा रहे थे ताकि ऑप्शंस मार्केट में हजारों करोड़ कमा सकें। यह “लॉस लीडर” रणनीति किसी ई-कॉमर्स डिस्काउंट की तरह नहीं, बल्कि बाजार के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ एक अपराध है। जब एक हाथी तालाब में कूदता है, तो लहरें नहीं उठतीं, सुनामी आती है—और उस सुनामी में छोटी मछलियां (रिटेल निवेशक) बह जाती हैं।
राजनीतिक और आर्थिक निहितार्थ: FIIs की काली भेड़ें
इस घटना के गहरे राजनीतिक और आर्थिक मायने हैं। भारत सरकार और बाजार नियामक (Regulators) लगातार विदेशी निवेश (FIIs) को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन Jane Street का मामला यह साबित करता है कि सभी FIIs भारत की ग्रोथ स्टोरी में हिस्सा लेने नहीं आते; कुछ सिर्फ सिस्टम को लूटने आते हैं।
जहां एक तरफ घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) बाजार को स्थिरता प्रदान करने की कोशिश करते हैं, वहीं Jane Street जैसे FIIs बाजार में अस्थिरता (Volatility) पैदा कर रहे थे। उन्होंने भारत में अपनी एक इकाई (JSI Investments Pvt Ltd) भी बनाई ताकि वे उन नियमों से बच सकें जो FPIs पर इंट्राडे ट्रेडिंग को लेकर लागू होते हैं। यह सीधे तौर पर भारतीय कानूनों के साथ खिलवाड़ है।
SEBI का यह कदम एक कड़ा राजनीतिक संदेश भी है: भारत अब एक ‘सॉफ्ट टारगेट’ नहीं है। 4800 करोड़ रुपये का यह impound order यह दिखाता है कि भारत के नियामक अब “टू बिग टू फेल” (Too Big to Fail) की अवधारणा से नहीं डरते। यह कार्रवाई बाजार के उन “अदृश्य हाथों” के लिए एक चेतावनी है जो अपनी वित्तीय ताकत का दुरुपयोग कर रहे हैं।
निष्कर्ष: बाजार की सफाई या सिर्फ शुरुआत?
Jane Street Group पर लगा यह प्रतिबंध और 4843 करोड़ रुपये (विस्तृत गणना के अनुसार) जब्त करने का आदेश भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट है। SEBI ने स्पष्ट कर दिया है कि बाजार में “लाभ कमाने” और “बाजार को लूटने” के बीच एक महीन रेखा है, जिसे पार करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी।
लेकिन बड़ा सवाल अभी भी बना हुआ है: क्या Jane Street अकेला है? या फिर हाई-स्पीड ट्रेडिंग की दुनिया में ऐसे और भी कई खिलाड़ी हैं जो अभी भी पकड़ से बाहर हैं? एक आम निवेशक के तौर पर, आपको यह समझना होगा कि बाजार केवल फंडामेंटल्स पर नहीं चलता; कभी-कभी यह उन लोगों की दया पर चलता है जिनके पास सबसे तेज कंप्यूटर और सबसे गहरी जेबें होती हैं। जब तक SEBI जैसे नियामक जागते रहेंगे, उम्मीद की किरण बाकी है, लेकिन सावधानी अब एक विकल्प नहीं, बल्कि मजबूरी है।