नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए नए ग्रामीण रोजगार बिल ‘VB-G RAM G’ (विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन) ने एक बड़े राजनीतिक संग्राम का रूप ले लिया है। दो दशक पुराने ‘मनरेगा’ (MGNREGA) कानून को बदलने और उसमें से महात्मा गांधी का नाम हटाने के प्रस्ताव पर कांग्रेस नेतृत्व ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। जहां प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसे सरकार की “नाम बदलने की सनक” करार दिया, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे गरीबों के “अधिकार छीनने” की साजिश बताया है।

प्रियंका का सवाल: ‘नाम बदलने की क्या है सनक?’
वायनाड से सांसद और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में बिल पेश किए जाने के दौरान सरकार की मंशा पर गहरे सवाल उठाए। उन्होंने इस बदलाव को अनावश्यक और संसाधनों की बर्बादी बताया।
सदन में अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए प्रियंका गांधी ने कहा:
“मुझे समझ नहीं आता कि नाम बदलने की यह सनक (obsession) क्या है? इसमें बहुत खर्चा होता है… मुझे समझ नहीं आता कि वे ऐसा अनावश्यक रूप से क्यों कर रहे हैं”,।
उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि महात्मा गांधी केवल उनके परिवार के सदस्य नहीं थे, बल्कि वह पूरे राष्ट्र के लिए परिवार समान थे। उन्होंने सरकार पर “व्यक्तिगत सनक और पूर्वाग्रह” के आधार पर कानून बनाने का आरोप लगाया और मांग की कि इस बिल को जल्दबाजी में पास करने के बजाय संसदीय स्थायी समिति (Standing Committee) के पास भेजा जाना चाहिए,।
खड़गे का वार: ‘यह नाम बदलना नहीं, अधिकार छीनना है’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे को केवल नाम तक सीमित न रखते हुए इसे गरीबों के पेट पर लात मारने वाला कदम बताया। उन्होंने संसद परिसर में गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक विरोध मार्च का नेतृत्व किया और सरकार पर दलितों, पिछड़ों और गरीबों के ‘काम के अधिकार’ (Right to Work) को खत्म करने का आरोप लगाया,।
खड़गे ने कड़े शब्दों में कहा:
“यह सिर्फ नाम बदलने की बात नहीं है। यह काम के अधिकार को छीनने के बारे में है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो कमजोर, हाशिए पर और दलित वर्ग से आते हैं… हम गरीबों के अधिकार छीनने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध करेंगे”,।
खड़गे ने इसे बीजेपी और आरएसएस द्वारा महात्मा गांधी की विरासत को मिटाने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार संघ का शताब्दी वर्ष मना रही है और दूसरी तरफ गांधी का नाम मिटाकर पाखंड कर रही है।
विवाद की जड़: ‘G RAM G’ और बदलता ढांचा
विपक्ष का गुस्सा केवल नाम बदलने पर नहीं, बल्कि बिल के नए प्रावधानों पर भी है, जिसे वे मनरेगा की मूल आत्मा के खिलाफ मानते हैं:
1. गांधी बनाम G RAM G: सरकार ने बिल का नाम बदलकर ‘VB-G RAM G’ कर दिया है। शशि थरूर और सौगत राय जैसे सांसदों ने आपत्ति जताई कि महात्मा गांधी का नाम हटाकर एक अजीबोगरीब एक्रोनिम (G RAM G) बनाना राष्ट्रपिता का अपमान है,।
2. फंडिंग का बोझ और राज्यों पर दबाव: नए बिल में प्रस्ताव है कि रोजगार गारंटी का 40% खर्च अब राज्य सरकारों को उठाना होगा (पहले केंद्र मजदूरी का 100% देता था)। विपक्ष का कहना है कि इससे गरीब राज्यों की कमर टूट जाएगी और योजना ठप हो जाएगी, जो अंततः गरीबों के रोजगार के अधिकार को खत्म कर देगा,।
3. मांग बनाम सप्लाई: तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के नेताओं ने तर्क दिया कि मनरेगा ‘मांग-आधारित’ (Demand-driven) कानून था, लेकिन नया बिल इसे ‘सप्लाई-आधारित’ और बजट तक सीमित कर रहा है, जो मजदूरों के हितों के खिलाफ है。
सड़क से संसद तक संग्राम कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों ने संसद के बाहर हाथों में महात्मा गांधी की तस्वीरें लेकर प्रदर्शन किया और नारे लगाए- “महात्मा गांधी का अपमान नहीं सहेंगे”। मल्लिकार्जुन खड़गे ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी इस “तानाशाही सरकार” के खिलाफ हर जिले और राज्य में विरोध प्रदर्शन करेगी।
जहां सरकार का तर्क है कि 125 दिन का रोजगार देकर वे योजना को मजबूत कर रहे हैं, वहीं विपक्ष का मानना है कि गांधी का नाम हटाना और फंडिंग के नियम बदलना इस ऐतिहासिक योजना को खत्म करने की शुरुआत है,।