वोट चोर या गद्दार? दिल्ली की रैली में खड़गे ने की ‘गद्दारों’ को सत्ता से उखाड़ फेंकने की बात

नई दिल्ली: देश की राजधानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को सियासी पारा सातवें आसमान पर था। कांग्रेस पार्टी ने “वोट चोर, गद्दी छोड़” (Vote Chor, Gaddi Chhod) के नारे के साथ एक विशाल रैली का आयोजन किया, जिसमें विपक्ष ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (ECI) पर अब तक के सबसे तीखे हमले बोले। इस रैली का मुख्य केंद्र बिंदु कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का वह बयान रहा, जिसमें उन्होंने सत्ताधारी पक्ष को सीधे तौर पर “गद्दार” करार दिया और उन्हें सत्ता से उखाड़ फेंकने का आह्वान किया।

खड़गे की ललकार: ‘वे वोट चोरी करके बैठे हैं’

रैली को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार जनादेश के माध्यम से नहीं, बल्कि चुनावी हेराफेरी और “वोट चोरी” के माध्यम से सत्ता में आई है।

खड़गे ने अपने भाषण में कहा, “भाजपा के नेता केवल नाटक करते हैं… जब संसद का सत्र चलता है, तो पीएम मोदी कभी सत्र में शामिल नहीं होते बल्कि विदेश चले जाते हैं।” उन्होंने आगे बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “वे सब ‘वोट चोरी’ करके सत्ता में बैठे हैं, हमें इन ‘गद्दारों’ को सत्ता से हटाना होगा।” खड़गे का यह बयान कांग्रेस की उस नई रणनीति को दर्शाता है, जिसमें वह अब चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को ही मुख्य मुद्दा बना रही है।

राहुल गांधी: ‘वोट चोरी सबसे बड़ा राष्ट्रविरोधी कृत्य’

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को राष्ट्रवाद से जोड़ते हुए कहा कि “वोट चोरी करना सबसे बड़ा राष्ट्रविरोधी (anti-national) कृत्य है।” उन्होंने संसद और रैली दोनों मंचों से आरोप लगाया कि भारत के चुनाव आयोग (ECI) पर संस्थागत कब्जा हो चुका है और वह भाजपा के साथ मिलीभगत कर रहा है।

राहुल गांधी ने महाराष्ट्र और हरियाणा चुनावों के आंकड़ों का हवाला देते हुए गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि “हरियाणा के चुनाव चोरी किए गए और चुनाव आयोग ने यह चोरी सुनिश्चित की।” उन्होंने यह भी सवाल किया कि चुनाव आयोग ने सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित रखने के नियमों को क्यों बदला और मुख्य न्यायाधीश (CJI) को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से क्यों हटाया गया।

महाराष्ट्र और बिहार के आंकड़ों का ‘खेल’

कांग्रेस और नागरिक संगठनों द्वारा जारी की गई रिपोर्ट्स, विशेषकर ‘वोट फॉर डेमोक्रेसी’ (VFD) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए रैली में चौंकाने वाले आंकड़ों पर चर्चा की गई। विपक्ष ने दावा किया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में मतदान खत्म होने (शाम 5 बजे) के बाद वोटिंग प्रतिशत में रहस्यमयी तरीके से 7.83% की बढ़ोतरी हुई, जिसे ‘मिडनाइट मिस्ट्री’ कहा जा रहा है।

इसके अलावा, यह आरोप लगाया गया कि महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच के 6 महीनों में 48 लाख से अधिक नए मतदाता जोड़े गए, जो एक असामान्य वृद्धि है। विशेष रूप से उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सीट (नागपुर दक्षिण पश्चिम) पर 6 महीने में 29,000 से अधिक नए मतदाता जुड़ने पर सवाल उठाए गए।

दूसरी ओर, बिहार में चल रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के तहत लगभग 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाने (डिलीट करने) को लेकर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा है। कांग्रेस का आरोप है कि यह गरीबों और वंचितों को मताधिकार से वंचित करने की साजिश है।

‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’: भाजपा का पलटवार

कांग्रेस की इस रैली पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की रैली में “मोदी तेरी कब्र खुदेगी” जैसे आपत्तिजनक नारे लगाए गए। भाजपा नेताओं, सुधांशु त्रिवेदी और शहजाद पूनावाला ने दावा किया कि कांग्रेस का असली एजेंडा पीएम मोदी को “खत्म” (eliminate) करना है और वे अराजकता फैलाना चाहते हैं।

भाजपा ने कांग्रेस को “मुस्लिम लीग-माओवादी” एजेंडे पर चलने वाली पार्टी बताया और कहा कि चुनाव आयोग पर सवाल उठाना संवैधानिक संस्थाओं का अपमान है। केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने संसद में इन नारों की निंदा करते हुए सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से माफी की मांग की।

विपक्ष में दरार?

हालांकि कांग्रेस इस मुद्दे पर आक्रामक है, लेकिन ‘INDIA’ गठबंधन के कुछ सहयोगी इस अभियान से दूरी बनाते दिख रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि “वोट चोरी” कांग्रेस का मुद्दा है और “INDIA ब्लॉक का इससे कोई लेना-देना नहीं है।” उन्होंने कहा कि हर पार्टी अपना एजेंडा तय करने के लिए स्वतंत्र है।

निष्कर्ष

दिल्ली की यह रैली भारतीय राजनीति में एक नए टकराव का संकेत है। जहां एक तरफ कांग्रेस ने 5 करोड़ हस्ताक्षरों के साथ “वोट चोरी” के खिलाफ देशव्यापी अभियान छेड़ दिया है, वहीं भाजपा इसे हताशा और राष्ट्रविरोधी सोच बता रही है। खड़गे द्वारा “गद्दार” शब्द का प्रयोग और राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग को सीधे कटघरे में खड़ा करना यह बताता है कि आने वाले समय में चुनावी सुधार और ईवीएम (EVM) की विश्वसनीयता पर सियासी संग्राम और तेज होगा।

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