“खाड़ी में भारत का ‘मास्टरस्ट्रोक’: ओमान डील से चीन की चाल होगी नाकाम, समंदर पर अब सिर्फ भारत का राज!”

पश्चिम एशिया में भारत की नई धाक: पीएम मोदी का ओमान दौरा और ऐतिहासिक CEPA समझौता

18 दिसंबर 2025 का दिन भारतीय कूटनीति के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। जब पूरी दुनिया पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और आर्थिक सुस्ती की आहट से सहमी हुई है, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मस्कट में एक ऐसा ‘मास्टरस्ट्रोक’ खेला है, जिसकी गूंज बीजिंग से लेकर वाशिंगटन तक सुनाई देगी। ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ ऐतिहासिक ‘व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते’ (CEPA) पर हस्ताक्षर करके भारत ने न केवल अपनी अर्थव्यवस्था के लिए एक नया हाईवे तैयार किया है, बल्कि अरब सागर में अपनी सामरिक पकड़ को इतना मजबूत कर लिया है कि दुश्मन देश अब आंख उठाने से पहले सौ बार सोचेंगे,। यह महज एक व्यापारिक समझौता नहीं है; यह खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में भारत के बढ़ते वर्चस्व और ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में एक विशाल छलांग है,।

व्यापारिक सर्जिकल स्ट्राइक: 98% उत्पादों पर टैक्स खत्म, ओमान में ‘मेड इन इंडिया’ का बोलबाला

इस समझौते की सबसे बड़ी जीत भारतीय निर्यातकों और मैन्युफैक्चरर्स के लिए है। ओमान ने अपने खजाने के दरवाजे भारत के लिए पूरी तरह खोल दिए हैं। इस डील के तहत, ओमान ने 98.08% भारतीय उत्पादों पर सीमा शुल्क (Customs Duty) को पूरी तरह समाप्त कर दिया है,। इसका सीधा मतलब यह है कि अब भारत का कपड़ा, दवाइयां, मशीनरी, और ज्वैलरी ओमान के बाजार में बिना किसी रोक-टोक और बिना किसी टैक्स के बेची जा सकेंगी।

सोचिए, पहले जिन भारतीय सामानों पर 5% से लेकर 100% तक का टैक्स लगता था, अब वे ‘जीरो ड्यूटी’ पर वहां पहुंचेंगे,। यह भारतीय MSMEs और लेबर-इंटेंसिव सेक्टर (जैसे टेक्सटाइल और लेदर) के लिए किसी वरदान से कम नहीं है,। जहां एक तरफ अमेरिका और यूरोप कार्बन टैक्स और टैरिफ की दीवारें खड़ी कर रहे हैं, वहीं भारत ने ओमान के साथ डील करके अपनी ‘De-risking’ रणनीति का लोहा मनवाया है,। अब भारतीय उत्पाद सस्ते होंगे, प्रतिस्पर्धी होंगे और खाड़ी के बाजारों में चीन के सस्ते माल को कड़ी टक्कर देंगे। यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर एक सोची-समझी सर्जिकल स्ट्राइक है।

दुकम पोर्ट और अरब सागर: ड्रैगन की घेराबंदी और भारत की ‘Necklace of Diamonds’ रणनीति

अगर आपको लगता है कि यह डील सिर्फ पैसों और व्यापार तक सीमित है, तो आप बड़ी तस्वीर नहीं देख पा रहे हैं। इस समझौते का असली ‘गेम-चेंजर’ पहलू रक्षा और समुद्री सुरक्षा है। ओमान, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के मुहाने पर बैठा है, भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है,। पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने ‘मैरीटाइम कोऑपरेशन’ (Maritime Cooperation) पर एक ज्वाइंट विजन डॉक्यूमेंट अपनाया है, जो अरब सागर में भारत की सुरक्षा को अभेद्य बनाएगा,।

ओमान का दुकम पोर्ट (Duqm Port) भारत की नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स हब बन चुका है। यह पोर्ट भारत को पश्चिमी हिंद महासागर में अपनी नौसेना को तैनात करने, रीफ्यूलिंग करने और निगरानी रखने की सुविधा देता है,। यह वही क्षेत्र है जहां चीन अपनी नौसेना (PLA Navy) की गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। दुकम पोर्ट तक भारत की पहुंच चीन के ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ के जवाब में भारत की ‘Necklace of Diamonds’ रणनीति का एक चमकदार हिस्सा है। ओमान के साथ मिलकर भारत अब समुद्री अपराधों, पाइरेसी और दुश्मन की पनडुब्बियों पर बाज जैसी नजर रख सकेगा,। अब समंदर पर वही राज करेगा, जिसका दोस्त ओमान जैसा रणनीतिक खिलाड़ी होगा—और वह दोस्त भारत है।

भविष्य की ऊर्जा: तेल से आगे बढ़कर ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ की बादशाहत

भारत और ओमान का रिश्ता अब केवल तेल और गैस खरीदने-बेचने तक सीमित नहीं रहा। पीएम मोदी ने इस रिश्ते को भविष्य के ईंधन यानी ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ और ‘ग्रीन अमोनिया’ की ओर मोड़ दिया है,। ओमान में चल रहे एसीएमई (ACME) प्रोजेक्ट, जिसका उद्देश्य 2027 तक बड़े पैमाने पर ग्रीन अमोनिया का उत्पादन करना है, में भारत की भूमिका केंद्रीय है,।

पीएम मोदी ने ओमान के साथ अगले 5 सालों में ग्रीन एनर्जी सेक्टर में 5 नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने का सुझाव दिया है। यह भारत की उस दूरदर्शी सोच को दर्शाता है जहां हम केवल ऊर्जा के उपभोक्ता नहीं, बल्कि उत्पादक और तकनीक के साझेदार बन रहे हैं। ओमान का विजन 2040 और भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता मिलकर दुनिया के एनर्जी मैप को फिर से परिभाषित करेंगे,। जब पूरी दुनिया तेल के लिए युद्ध लड़ रही है, भारत और ओमान मिलकर भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा का साम्राज्य खड़ा कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषण: चीन के लिए स्पष्ट संदेश और पश्चिम को आईना

ओमान के साथ यह CEPA समझौता एक बहुत बड़ा भू-राजनीतिक (Geopolitical) संकेत है। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव है और लाल सागर (Red Sea) में अनिश्चितता है। ओमान की ‘तटस्थता’ की नीति जगजाहिर है, और ऐसे देश का भारत के साथ इतना गहरा रणनीतिक गठबंधन बनाना बताता है कि ग्लोबल साउथ में भारत का कद कितना बढ़ चुका है,।

चीन, जो अपने ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) के जरिए छोटे देशों को कर्ज के जाल में फंसाता है, उसके लिए भारत का यह मॉडल एक तगड़ा जवाब है। भारत का मॉडल ‘विश्वास’ और ‘साझा विकास’ पर आधारित है, न कि शोषण पर। 6,000 से अधिक ज्वाइंट वेंचर्स और अरबों डॉलर का निवेश यह साबित करता है कि भारत ओमान का सच्चा साथी है,। इसके अलावा, इस डील में भारतीय पेशेवरों (Professionals) के लिए वीजा नियमों में ढील और ‘ओमानाइजेशन’ (Omanisation) नीति के बावजूद भारतीय कामगारों के हितों की रक्षा करना मोदी सरकार की बड़ी कूटनीतिक जीत है,। यह समझौता चीन के मंसूबों पर पानी फेरने के लिए काफी है क्योंकि अब भारत के पास ओमान के रूप में एक ऐसा भरोसेमंद साथी है जो हिंद महासागर में चीन की किसी भी चाल को नाकाम कर सकता है।

निष्कर्ष: 70 साल का भरोसा और एक नया सुनहरा अध्याय

अंततः, पीएम मोदी की मस्कट यात्रा और ओमान के सुल्तान द्वारा उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ ओमान’ (Order of Oman) से नवाजा जाना यह साबित करता है कि दोनों देशों के रिश्ते अब एक नई ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं,। यह सम्मान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है।

भारत ने साबित कर दिया है कि वह अपनी शर्तों पर दुनिया से रिश्ता निभाना जानता है। CEPA समझौता केवल कागजों पर किए गए हस्ताक्षर नहीं हैं; यह भारत के महाशक्ति बनने की दिशा में एक और बड़ा कदम है। ओमान के साथ मिलकर भारत ने अरब सागर में एक ऐसा सुरक्षा चक्र और आर्थिक गलियारा तैयार कर लिया है जिसे भेदना किसी के बस की बात नहीं। खाड़ी में भारत का यह ‘मास्टरस्ट्रोक’ वाकई में चीन की नींद उड़ाने वाला है। अब यह कहना गलत नहीं होगा—समंदर पर, व्यापार में और कूटनीति में, अब सिर्फ और सिर्फ भारत का राज है!

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